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Friday, March 26, 2010

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया है मेरे आगे



Lyrics: Mirza Ghalib

Singer: Jagjit Singh


बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया है मेरे आगे

होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे।


होता है निहाँ गर्द में सहरा मेरे होते

घिसता है जबीं ख़ाक पे दरिया मेरे आगे।


मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे

तू देख कि क्या रंग है तेरा मेरे आगे।


ईमान मुझे रोके है जो खींचे है मुझे कुफ़्र

काबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे।


गो हाथ को जुम्बिश नहीं आँखों में तो दम है

रहने दो अभी सागर-ओ-मीना मेरे आगे।

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